निर्माण कार्य में लोहे की छड़ों (reinforcement bars) का सही स्थान पर टिके रहना बेहद आवश्यक होता है। यदि ये छड़ें अपनी जगह से हिल जाएँ तो पूरी संरचना की मजबूती पर असर पड़ता है। इसी समस्या का समाधान है चेयर बार, chair bar छोटे लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं, जो स्लैब और फुटिंग में ऊपरी और निचली छड़ों के बीच उचित दूरी बनाए रखते हैं। यह लेख चेयर बार की परिभाषा, उपयोगिता, संरचना और गणना की विधि पर विस्तार से प्रकाश डालता है।
chair bar क्या है?
chair bar एक प्रकार का स्टील से मोड़ कर बनाया गया आकर होता है जो देखने पर भी किसी कुर्सी को सहारा दे रहा है ऐसा लगता है, इस स्टील को इस से तरह बनाया जाता है कि वह ऊपरी और निचली छड़ों को सही स्थिति में बनाए रखे “ या यूँ कहें की ये स्टील की दो लेयेर्रों के बीच नियमीत दुरी बना कर रखता है”, इसे “चेयर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका आकार कुर्सी जैसा होता है – ऊपर सिर (head), बीच में ऊँचाई (height) और नीचे पैर (legs)
उदाहरण के लिए, जब किसी स्लैब में ऊपर और नीचे दोनों तरफ लोहे की छड़ें डाली जाती हैं, तो उनके बीच की दूरी बनाए रखने के लिए चेयर बार लगाया जाता है। यदि चेयर बार न हो तो ऊपरी छड़ें नीचे की ओर झुक सकती हैं और कंक्रीट डालते समय उनका संतुलन बिगड़ सकता है।

चेयर बार का महत्व
chair bar का महत्व केवल सहारा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी संरचना की मजबूती और टिकाऊपन से जुड़ा हुआ है।
- सही स्थिति बनाए रखना: चेयर बार यह सुनिश्चित करता है कि ऊपरी और निचली छड़ें अपनी जगह से न हिलें। उदाहरण के लिए, यदि स्लैब में ऊपरी छड़ें नीचे खिसक जाएँ तो पूरी डिजाइन कमजोर हो जाएगी।
- कवर बनाए रखना: कंक्रीट में छड़ों को ढकने के लिए एक निश्चित मोटाई (cover) रखी जाती है। chair bar इस कवर को बनाए रखने में मदद करता है।
- कंक्रीट का चारों ओर फैलाव: जब छड़ें सही स्थिति में रहती हैं तो कंक्रीट उन्हें चारों ओर से घेर लेता है। इससे संरचना की मजबूती बढ़ती है।
- कंपन और भार सहन करना: कंक्रीट डालते समय कंपन मशीन का उपयोग होता है। चेयर बार ऊपरी छड़ों को गिरने से बचाता है और मजदूरों के वजन को भी सहन करता है।
चेयर बार के उपयोग
chair barका उपयोग मुख्य रूप से स्लैब, फुटिंग और राफ्ट फाउंडेशन में किया जाता है।
- स्लैब में: स्लैब में ऊपरी और निचली छड़ों के बीच दूरी बनाए रखने के लिए चेयर बार लगाया जाता है।
- फुटिंग में: फुटिंग में ऊपरी और निचली जालियों (cages) को स्थिर रखने के लिए चेयर बार आवश्यक होता है।
- राफ्ट फाउंडेशन में: बड़े क्षेत्र में फैली नींव में chair bar का उपयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहाँ छड़ों की संख्या अधिक होती है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी भवन की नींव 500 मिमी मोटी है, तो chair bar यह सुनिश्चित करेगा कि ऊपरी और निचली छड़ें बराबर दूरी पर रहें और नींव की मजबूती बनी रहे।

चेयर बार के भाग
चेयर बार को तीन मुख्य भागों में बाँटा जाता है:
- हेड (Head): यह ऊपरी क्षैतिज हिस्सा होता है, जिस पर ऊपरी छड़ें टिकती हैं।
- ऊँचाई (Height): यह ऊर्ध्वाधर दूरी होती है, जो ऊपरी और निचली छड़ों के बीच बनाए रखी जाती है।
- पैर (Legs): यह निचला हिस्सा होता है, जो chair bar को जमीन या फॉर्मवर्क पर टिकाए रखता है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी chair bar की ऊँचाई 500 मिमी है, तो इसका मतलब है कि यह ऊपरी और निचली छड़ों के बीच इतनी दूरी “500mm” बनाए रखेगा।
chair bar की आवश्यकता क्यों होती है?
चेयर बार की आवश्यकता कई कारणों से होती है:
- संरचना की मजबूती: यदि छड़ें अपनी जगह से हिल जाएँ तो पूरी संरचना कमजोर हो सकती है। चेयर बार इस समस्या को रोकता है।
- काम की सफाई: चेयर बार लगाने से छड़ें व्यवस्थित रहती हैं और काम साफ-सुथरा दिखता है।
- तनाव सहन करना: कंक्रीट में तनाव (tension) और दबाव (compression) दोनों होते हैं। चेयर बार तनाव वाले हिस्से को मजबूत बनाने में मदद करता है।
- कंक्रीट डालते समय सहारा: जब ताज़ा कंक्रीट डाला जाता है तो उसका भार छड़ों पर पड़ता है। chair bar इस भार को सहन करता है।
चेयर बार का Practicle उदाहरण
मान लीजिए कि किसी फुटिंग की ऊँचाई 400 मिमी है और ऊपर-नीचे की छड़ों का व्यास क्रमशः 20 मिमी और 16 मिमी है। यदि कवर 50 मिमी रखा गया है, तो चेयर बार की ऊँचाई इस प्रकार निकाली जाएगी:
ऊँचाई = 400 – (2 × 50) – 2x (20 + 16) = 228 मिमी
इसी तरह, हेड और पैर की लंबाई भी छड़ों की दूरी के अनुसार निकाली जाती है। अंत में, पूरे चेयर बार की कटिंग लंबाई लगभग 1.8 मीटर आती है।

chair bar हेड और पैर की लंबाई छड़ों की दूरी के अनुसार कैसे निकाली जाती है
“How are the head and leg length of a chair bar calculated based on the distance between the rods?”
चेयर बार के दो महत्वपूर्ण हिस्से—हेड (Head) और पैर (Legs)—की लंबाई हमेशा छड़ों के बीच की दूरी (spacing) पर निर्भर करती है। यह दूरी तय करती है कि चेयर बार कितना चौड़ा और कितना स्थिर बनेगा। आइए इसे विस्तार से समझें:
1. हेड (Head) की लंबाई
हेड चेयर बार का ऊपरी क्षैतिज हिस्सा होता है, जिस पर ऊपरी जाली (top cage reinforcement) टिकती है।
- इसकी लंबाई इस बात पर निर्भर करती है कि ऊपर की distribution bars कितनी दूरी पर रखी गई हैं।
- सामान्य सूत्र है
Head Length = (2 x Spacing of distribution bar) + (2 x cover allowance)
- उदाहरण: यदि distribution bars का spacing 150 मिमी है और दोनों तरफ 50 मिमी का allowance लिया गया है, तो हेड की लंबाई होगी:
(2 x 150) + ( 2 x 50) = 400 mm
इसका मतलब है कि हेड इतना चौड़ा होगा कि वह दो distribution bars को पकड़ सके और दोनों तरफ अतिरिक्त हिस्सा भी रहे ताकि छड़ें मजबूती से टिक सकें।
2. पैर (Legs) की लंबाई
पैर चेयर बार का निचला हिस्सा होता है, जो नीचे की जाली (bottom cage reinforcement) को पकड़ता है और फॉर्मवर्क पर टिकता है।
- इसकी लंबाई नीचे की main bars के spacing पर निर्भर करती है।
- सामान्य सूत्र है:
Leg Length = ( 2 x Spacing of bottom main bar) + (extra allowance)
- उदाहरण: यदि नीचे की main bars का spacing 150 मिमी है और अतिरिक्त allowance 50 मिमी लिया गया है, तो पैर की लंबाई होगी:
(2 x 150) + (50) = 350 mm
इसका मतलब है कि पैर इतना लंबा होगा कि वह दो main bars को पकड़ सके और थोड़ा अतिरिक्त हिस्सा भी रहे ताकि चेयर बार स्थिर खड़ा रह सके।
3. spacing पर निर्भरता क्यों होती है?
Spacing यानी छड़ों के बीच की दूरी ही यह तय करती है कि चेयर बार का हेड और पैर कितना बड़ा होना चाहिए।
- यदि छड़ों की दूरी अधिक है तो हेड और पैर की लंबाई भी बढ़ानी पड़ती है ताकि चेयर बार दोनों छड़ों को पकड़ सके।
- यदि spacing कम है तो हेड और पैर छोटे होंगे।
- उदाहरण: यदि spacing 200 मिमी कर दिया जाए तो हेड और पैर की लंबाई भी उसी अनुसार बढ़ जाएगी।
अगर हमारा साईट पर माप इस पारकर हो तो :
- Distribution bar spacing = 120 मिमी
- Bottom main bar spacing = 100 मिमी
- Cover allowance = 40 मिमी
तो हमारे Chair Bar Steel की Head and Leg की लम्बाई इस प्रकार निकलेगी :
- Head length = (2 × 120) + (2 × 40) = 320 मिमी
- Leg length = (2 × 100) + 40 = 240 मिमी
इस तरह spacing बदलते ही हेड और पैर की लंबाई भी बदल जाती है।
इस गड़ना को करते समय ध्यान देने वाली बात यह है की – हेड की लंबाई ऊपर की distribution bars की दूरी से तय होती है, जबकि पैर की लंबाई नीचे की main bars की दूरी से, दोनों में थोड़ा अतिरिक्त allowance जोड़ा जाता है ताकि चेयर बार मजबूती से टिक सके और छड़ों को सही जगह पर पकड़ सके।
चेयर बार की मजबूती
चेयर बार का व्यास कम से कम 12 मिमी होना चाहिए। यदि इससे पतला बार लिया जाए तो वह भार सहन नहीं कर पाएगा। उदाहरण के लिए, यदि मजदूर स्लैब पर खड़े हों और चेयर बार पतला हो तो वह टूट सकता है। इसलिए मानक के अनुसार 12 मिमी या उससे अधिक व्यास का बार ही उपयोग करना चाहिए।
निष्कर्ष
चेयर बार भले ही आकार में छोटे हों, लेकिन उनका महत्व अत्यधिक है। यह ऊपरी और निचली छड़ों को सही स्थिति में बनाए रखते हैं, कंक्रीट को चारों ओर से घेरने में मदद करते हैं और पूरी संरचना की मजबूती सुनिश्चित करते हैं। निर्माण कार्य में यदि chair bar का उपयोग न किया जाए तो स्लैब और फुटिंग की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
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